begining लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
begining लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

कविता के लिए जरुरी हैं - Kavita ke liye jaruri hain


कविता के लिए जरुरी हैं मेरा अकेला होना
कविता के लिए जरुरी हैं मेरा खुद में खोना,
कविता ऐसे ही किसी के पास नहीं आती,
कविता के लिए जरुरी हैं, मेरा खाली होना ||

नहीं तो ये ऐसे ही, दरवाजा ठोक कर निकल जाती हैं
दबे पावों से घंटी बजाकर, छुपकर निकल जाती हैं
इसे अच्छा नहीं लगता, मेरा औरों से घिरा हुआ होना
कविता के लिए जरुरी हैं मेरा अकेला होना ||

कभी ये बादल की तरह आती हैं, और घिरी की घिरी रह जाती हैं
बिन-बरसे ही अपने होने का अहसास दिलाती रहती है
जरुरी तो हैं, इसके प्रगटन का हुनर होना, पर
कविता के लिए जरुरी हैं मेरा अकेला होना ||

कभी ये बारिश की तरह मुसलाधार बरसती हैं
सारे बंधन तोड़कर, आसुओं की तरह बहती हैं
आती हैं ये उपरवाले का नजराना बनकर,
पर फिर भी
कविता के लिए जरुरी हैं मेरा अकेला होना ||

गुरुवार, 12 नवंबर 2015

अंत (The End)


I wrote this today, in response to another blog by a blogger friend Nilesh Ranjan..Here is the link to his blog.

http://randomwithlife.com/2015/11/02

फिर कुछ उभरा होगा अपने ही अंत की राख से
फिर पत्तों की पांजेब बजी होगी, ठूंठ जैसे शाख से
फिर उमड़ा होगा सैलाब, रुके हुए किनारों से
फिर चल पड़ा होगा जीवन, नयी आशा की किरणों से ||

  

यही हैं जीवन, यही हैं मरण,  यही हैं यात्रा
आदि से अनंत तक, अनंत मरणों की जत्रा
फिर चलती हैं राहें जीवन की, रुकी हुई साँसे
फिर चलते हैं अर्जुन के साथ साथ, शकुनी के पांसे ||



यूँ ही चलेगा आवागमन का खेल
जब तक न हो जाए ओंकारसे ताल-मेल
फिर न होगा आना-जाना, न ही आदि-अंत
रुकेंगे स्वर्ग के द्वार पर – बुद्ध जैसे महंत ||