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शनिवार, 22 अगस्त 2015

Paramatma ke khabari se mulakat



परमात्मा के खबरी से मुलाकात

Written on 2013_Oct_24


आज रात ९ बजे फिर एक बार
परमात्मा के खबरी से बाते होंगी
चन्द्रगुप्त की पोतडी खुलेगी
फिर कर्मो का लेखा-जोखा होगा
मेरे वचनों के विश्लेषण होंगे
मेरी सादगी के आभूषण होंगे
मेरे दर्द का न्याय होगा
फिर तो, कर्मो की ही बाराते निकलेंगी
दी हुई गालियों का जनाजा निकलेगा
पर मौत भी इसका इलाज नहीं होगी
आज रात ९ बजे फिर एक बार
परमात्मा के खबरी से बाते होंगी


ये क्या क्या ढोये जा रही हु मैं
अब तो वजन का बटवारा होगा
सारे मकान जो पीछे छोड़ आयी हु
उनका भी फिर एक बार से सामना होगा
फिर तो उनकी भी मरम्मत होगी
क्या पता अब भी शायद
किसी को मुझ से शिकायत होगी
आज रात ९ बजे फिर एक बार
परमात्मा के खबरी से बाते होंगी


पतली सी लड़की से मोटी सी औरत
जाने अपनी चमड़ी में क्या क्या छुपाये रखती है
फिर तो गुप्त धन का भी पर्दाफाश होगा
अब ना छिप सकेंगी दर्दभरी दास्ताने
अब ना छिप सकेंगे, पुराने गीत मस्ताने
फिर तो सभी की धीरे धीरे पदयात्रा होगी
आज रात ९ बजे फिर एक बार
परमात्मा के खबरी से बाते होंगी


पाये थे जो पत्थर, आज उनकी
निखालस मोतियों में तबदीली होगी
फिर तो दर्द की नदी ही बहेगी
बहते बहते खबरी के पीछे पीछे मुड लेगी
फिर गुजरेंगे सूरज से होकर
अपनी जख्मो को उसकी गर्मी से धोकर
फिर बहेंगी हवा की लहरे
पुराने जख्मो को अपने स्पर्श से बदल कर
फिर तो खबरी के साथ साथ चलकर
परमात्मा से मुलाकाते होगी
आज रात ९ बजे फिर एक बार
परमात्मा के खबरी से बाते होंगी

जाने कब उसकी मेहेर-नजर होगी
जाने कब आनंद की बौछार होगी
जाने कब फिर सावन आएगा
जाने कब हिसाब का पिटारा बंद होगा
लेकिन फिर भी
आज रात ९ बजे और एक बार
परमात्मा के खबरी से बाते होंगी

रविवार, 5 जुलाई 2015

Kabhi

कभी सुला-सुलाकर  खुद को, जी लेती हूँ
कभी भुला-भुलाकर खुद को , जी लेती हूँ
कभी जगा-जगाकर खुद को, पी लेती हूँ
कभी मना-मनाकर खुद को, पा लेती हूँ

समय की धारा बस बहती रहती है
कभी रोक-रोककर खुद को, बहा लेती हूँ
कभी नोक-झोंक कर खुद को हँसा लेती हूँ
कभी होड़ लगाकर समय से, खुद को बीत लेती हूँ
कभी ज्योत जलाकर अ-मन की, खुद को चेत लेती हूँ

सोमवार, 29 जून 2015

Juud jaate hain mujh se judnewale

जुड़ जाते है मुझ से, जुडनेवाले


And this one is dedicated to the new friends who walked in my life with the gift of poetry in their hearts and their words....:)

(Written on 21st-Nov-2013)

जुड़ जाते है मुझ से, जुडनेवाले
पहुँच जाते है मुझ तक, सराहनेवाले
शब्दों का साथ लेकर, आ जाते है
शब्दातीत के अनुभव से खिलनेवाले
जुड़ जाते है मुझ से जुडनेवाले

जीवन के जंजाल है , बहकानेवाले
कामना के अंदाज है, लटकानेवाले
मेरे नयेपन की क्षमता को जगानेवाले
दोस्त बन जाते है, आंकनेवाले
जुड़ जाते है मुझ से जुडनेवाले


रस-धारा का अमृत मंथन, पीनेवाले
ह्रदय के रस को, शब्द-प्याली में,  ढालनेवाले
बूँद-बूँद को इज्जत से, संभालकर, पिलानेवाले
प्रतिस्पर्धी में प्रीति-बिम्ब अपना, देखनेवाले
जुड़ जाते है मुझ से जुडनेवाले