अदभुत है ये प्रेम भी
अद्भुत है ये प्रेम भी - मनुष्य को भिखारी बना देता है
अद्भुत है ये प्रेम भी - मनुष्य को भिखारी बना देता है
अद्भुत है ये प्रेम भी - प्रियतम को भगवान बना देता है
कभी Einstine, तो कभी शिव जी बना देता है
अद्भुत है ये प्रेम भी – इंसान को झुका देता है
छोटी छोटी हरकतों को खिलने का मौका देता है
अद्भुत है ये प्रेम भी – प्यासे को सावन बना देता है
कभी सावन को प्यासा बनाकर बारिश का दिलासा
देता है
अद्भुत है ये प्रेम भी – कभी उमंगो को फुहारे लाता है
कभी मुझे उनमे बहा देता है, कभी उनकी यादो में गुदगुदाता है
अद्भुत है ये प्रेम भी – कभी उनको थिर हिमालय बना देता है
कभी चंचल हिरनी की तरह, मुझको थिरकता मौसम बना देता है
अद्भुत है ये प्रेम भी – वाकई
अभिव्यक्ति 28 मार्च 2013
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