मंगलवार, 4 अगस्त 2015

Adbhut hain ye prem bhi

अदभुत है ये प्रेम भी 

अद्भुत है
ये प्रेम भी - मनुष्य को भिखारी बना देता है
अद्भुत है ये प्रेम भी - प्रियतम को भगवान बना देता है
कभी Einstine, तो कभी शिव जी बना देता है

अद्भुत है ये प्रेम भी इंसान को झुका देता है
छोटी छोटी हरकतों को खिलने का मौका देता है

अद्भुत है ये प्रेम भी प्यासे को सावन बना देता है
कभी सावन को प्यासा बनाकर बारिश का दिलासा देता है

अद्भुत है ये प्रेम भी कभी उमंगो को फुहारे लाता है
कभी मुझे उनमे बहा देता है, कभी उनकी यादो में गुदगुदाता है

अद्भुत है ये प्रेम भी कभी उनको थिर हिमालय बना देता है
कभी चंचल हिरनी की तरह, मुझको थिरकता मौसम बना देता है

अद्भुत है ये प्रेम भी वाकई



अभिव्यक्ति 28 मार्च 2013

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