गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015

Ai Ri Amrita


As an ardent fan of Amrita Pritam, I wrote this for her -  on 7-Sept-2014


ऐ री अमृता!!
तेरा अक्षरनामा  सज-धज के  आता हैं, किताबों से उठकर |
बरसता हैं आंखो से, तेरी सोहबत की बारिश बनकर|


ऐ री अमृता!!
क्या जानु मैं तू क्या लगती हैं मेरी, तेरे शब्दों मे खोकर| 
समय की दीवारें ढह जाती हैं, तुझको-मुझको जोडकर|


ऐ री अमृता!! मुझे निखार दे अपनी बेटी बनाकर|
बाहों मे सुलाकर, बरखा मे भिगोकर, खुशियों की पेटी बनाकर|

ऐ री अमृता!! 
जब जब तुझ से मिलती हूँ, पाठक/वाचक बनकर|
तू समा लेती हैं मुझको अपने आसमान मे, खुद का हिस्सा बनाकर|


ऐ री अमृता !
तेरे अल्फाज़ महज अल्फ़ाज़ नहीं, कायनात हैं |
दिलों को पिघलाकर  स्नेहसागर मे गिराना, ये तेरी ही करामात हैं|


ऐ री अमृता!!
तुम्हारे डॉक्टर देव के सजदे मे,  मैं ममता बन गयी|
हद तो तब हो गयी
रसीदी टिकिट पढ़ते पढ़ते, मैं अचानक अमृता अमृता हो गयी|
आंखो से तुम बहने लगी और मेरी अभिव्यक्ति खो गयी|


आंखो मे पानी बनकर ये नामा तुम्हारे लिए लिख रही हूँ|
पानी भी तुम, नामा भी तुम, तुमको ही प्रेम की अभिव्यक्ति बनाकर|

ऐ री अमृता!!
ऐ री अमृता!!

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