My life story लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
My life story लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 25 जून 2015

Main Chalati Firati Kavita Hun

मैं चलती फिरती कविता हूँ
(Written on 7th Nov 2013)
जीवन हूँ , नस नस में बहती हूँ
परमात्मा की बेटी हूँ ,
रस की पेटी हूँ,
मैं चलती फिरती कविता हूँ

 नूर की बूँद बन कर
मैं ही आँखों से टपकती हूँ
खुद की तक़दीर बन कर
मैं ही जुबा से निकलती हूँ
गौतम बुद्ध का मौन भी मैं ही
कालिदास का प्रेम भी मैं ही
मैं ही शिव की भक्ति भी
क्यों की मैं चलती फिरती कविता हूँ

बंद आँखों की गहराई हु
प्रिय से मिलन की शाहनाइ हूँ
आसुओं की तनहाई भी मैं ही
अपनी कमाई भी खुद मैं ही
मैं ही जगाती हूँ खुद को
अनाहत नाद गाकर
क्यों की मैं चलती फिरती कविता हूँ

इज्जत से प्रेम करती हूँ
रूमी (RUMI) से इजाजत पाकर
रोग-निवारण करती हूँ
अपने ही श्वास का मरहम लगाकर
मैं ही मंतर पढ़ती हु
खुद की शुद्धि के
क्यों की मैं चलती फिरती कविता हूँ

युग युग से ढूंढ रही हूँ
खुद ही के अफसाने को, फिर भी
खोया था कभी जाने कैसे,
पा लेती हूँ फिर फिर से
फिर फिर से खुद से मिल जाती हूँ
क्यों की, मैं इस अस्तित्व की अभिव्यक्ति हूँ

मैं होश की धारा हूँ
इंद्र के बगीचे का सुन्दर फव्वारा हूँ
बुड्ढो का बचपन भी मैं ही
बुद्धों की बुद्धि भी मैं ही
मैं शक्ति अनंत अपार हूँ
क्यों की मैं इस अस्तित्व की अभिव्यक्ति हूँ

मंगलवार, 23 जून 2015

Karmayug

कर्मयुग
(Written on 15-Dec-2013)

क्या कहना इस समय की धारा का
कल से इस बहाव का नया मोड़ होगा||

ये देखो बीत चुका, एक जीवन युग
कल से नए कर्मयुग का, नया आरंभ  होगा||

होंगे इसमें साथी, सारथी, और महारथी
और नए ऋषियों के साथ, नया यज्ञ होगा||

होंगे इसमें नए वक्ता, भोक्ता और ज्ञाता
और नयी जिज्ञासा से, नया संवाद होगा||

पल बीते, छल बीते, मेरे अनंत कल बीते
कल से नए सुर-ताल का, नया संगीत होगा||

जीवन ये क्तिना अटल, अटल अतल और क्षणभंगुर
कल से नयी अनंतता का, और एक संगम होगा||

मन रे !!
अब न बनाना कोई घोसला, नए पेड़ पर
की तुझ को है उड़ते जाना, पंखो में आसमान भरकर||

मन रे !!
अब न करना कोई कारीगरी, न ही भटकना
की तुझ को है चलते जाना, खुद ही का दीप बनकर||

करना अपने कर्तव्य और रहना सजग, प्रज्वलित
जल में कमलवत, ऐसा तेरा सम्मान होगा ||

कल से नए कर्म-युग का, नया आरम्भ होगा ||


रविवार, 21 जून 2015

Mi Ayushyachi ek atal kahani

Written on 28th May 2015

मी
, आयुष्याची एक अटळ कहाणी
मी, साठलेले वळचणीचे पाणी
मी, गुलमोहरावर दवबिंदूचे पाणी
मी, जगले येथे अगणित अगेय गाणी
मी, आयुष्याची एक अटळ कहाणी

मी, अस्तित्वाच्या आदि-शब्दाची कणी
भरधाव ढकलली कधी स्वारी माझी कोणी
मी चालूनी आले एक लांब पायवाट
अन जोडून नाती अनेक अनाम अनवाणी
मी, आयुष्याची एक अटळ कहाणी

मी जागले माझिया वचनांना
अन राखले स्वाभिमानी बाण्याला
फशी न पडता, हसू न विकता
मी जगले ऊंच झेप अन भरारी
मी, आयुष्याची एक अटळ कहाणी

अजूनही मी वाट ही जगतेच आहे
मनोगत अंतरीचे डोळ्यात झळकते आहे
अशीच जाईन अनंत अनंत नगरी
मी बुद्धत्वाचा बोध इथे या वळणी
मी, आयुष्याची एक अटळ कहाणी