मंगलवार, 23 जून 2015

Karmayug

कर्मयुग
(Written on 15-Dec-2013)

क्या कहना इस समय की धारा का
कल से इस बहाव का नया मोड़ होगा||

ये देखो बीत चुका, एक जीवन युग
कल से नए कर्मयुग का, नया आरंभ  होगा||

होंगे इसमें साथी, सारथी, और महारथी
और नए ऋषियों के साथ, नया यज्ञ होगा||

होंगे इसमें नए वक्ता, भोक्ता और ज्ञाता
और नयी जिज्ञासा से, नया संवाद होगा||

पल बीते, छल बीते, मेरे अनंत कल बीते
कल से नए सुर-ताल का, नया संगीत होगा||

जीवन ये क्तिना अटल, अटल अतल और क्षणभंगुर
कल से नयी अनंतता का, और एक संगम होगा||

मन रे !!
अब न बनाना कोई घोसला, नए पेड़ पर
की तुझ को है उड़ते जाना, पंखो में आसमान भरकर||

मन रे !!
अब न करना कोई कारीगरी, न ही भटकना
की तुझ को है चलते जाना, खुद ही का दीप बनकर||

करना अपने कर्तव्य और रहना सजग, प्रज्वलित
जल में कमलवत, ऐसा तेरा सम्मान होगा ||

कल से नए कर्म-युग का, नया आरम्भ होगा ||


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